वर्तमानेन कालेन वर्तयंती विचक्षणा: ।
(चाणक्य नीति 13/2)
बुद्धिमान मनुष्य वर्तमान की स्थिति के अनुसार ही व्यवहार करते हैं ।
मानसिक तप मनः प्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते।। श्रीमद् भागवत गीता ( 1 7:1 6 ) मन की प...