कर्णरोगान्तक प्राणायाम

कर्णरोगान्तक प्राणायाम


इस प्राणायाम में दोनों नासिकाओं से पूरक करके फिर मुँह एवं दोनों नासिकाएँ बन्द कर पूरक की हुई वायु को बाहर धक्का देते हैं, जैसे कि श्वास को कानों से बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है। 

जब वायु का कानों की ओर दबाव होता है तो कानों से स्वतः ही एक ध्वनि सी होती है। यही इसकी विधि है। 

श्वास को 4-5 बार ऊपर की ओर धक्का देकर फिर दोनों नासिकाओं से रेचक करें। इस प्रकार 2-3 बार करना पर्याप्त होगा।


लाभ :-

कर्णरोगों में लाभदायक, विशेषतः बहरेपन को दूर करता है।

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जीवन एक उपहार है प्रभु का जीवन एक उपहार है प्रभु का,  इसे प्रेम से जीना सीखो रे। हर श्वास में नाम बसाओ,  हर कर्म को पूजा बना लो रे॥ दुख-सुख ...