जीवन एक उपहार है प्रभु का
जीवन एक उपहार है प्रभु का, इसे प्रेम से जीना सीखो रे।
हर श्वास में नाम बसाओ, हर कर्म को पूजा बना लो रे॥
दुख-सुख आते-जाते पल हैं, पल में छाया, पल में धूप।
जो समभाव में जीना जाने, वही है सच्चा संत स्वरूप॥1॥
न धन साथ जाएगा कोई, न संग चलेगा अभिमान।
साथ चलेगा केवल कर्म, और हृदय का सच्चा ज्ञान॥2॥
दीन दुखी में ईश्वर देखो, सेवा को ही धर्म बनाओ।
अहंकार छोड़ प्रेम अपनाओ, मानव बनकर जीवन पाओ॥3॥
नाम सिमरन ही जीवन सार है, भक्ति ही सच्चा धन है रे।
प्रभु चरणों में मन लगाकर, जीवन सफल बनाओ रे॥