मानसिक तप
मनः प्रसादः सौम्यत्वं
मौनमात्मविनिग्रहः।
भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो
मानसमुच्यते।।
श्रीमद् भागवत गीता (17:16)
मन की प्रसन्नता, सौम्यता (सरलता/दयालुता), मौन, आत्मनिग्रह (स्वयं पर
नियंत्रण) और भावसंशुद्धि (विचारों व अंतःकरण की पवित्रता)—इन पांच गुणों को 'मानसिक तप' कहा जाता है।