आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः

 

आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः।

स्मृतिलम्भे सर्वग्रन्थीनां विप्रमोक्षः॥

 छान्दोग्य उपनिषद (7.26.2)


अर्थ: आहारशुद्धौ (आहार शुद्धि): शुद्ध, सात्विक और नियमित भोजन करने से।

सत्त्वशुद्धिः (सत्त्व शुद्धि): अंतःकरण (मन, बुद्धि, और हृदय) की शुद्धि होती है।

ध्रुवा स्मृतिः : अंतःकरण शुद्ध होने पर बुद्धि स्थिर और अटूट स्मरण शक्ति वाली हो जाती है।

स्मृतिलम्भे : उस अटल स्मरण (स्मृति) की प्राप्ति से आत्मज्ञान बढ़ता है और सभी भ्रम दूर हो जाते हैं।

सर्वग्रन्थीनां विप्रमोक्षः: हृदय की सभी गांठें (संदेह, कर्मबंधन, और अज्ञानता) खुल जाती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जगन्‍नाथ चक्‍का नैन नीलाचल वारे

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