संत के लक्षण

 

संत के लक्षण

श्री राम नारद संबादः

श्रीरामचरितमानस

(अरण्यकाण्ड)

संतों के लक्षण और सत्संग भजन के लिए प्रेरणा

चौपाई :

 जे न भजहिं अस प्रभु भ्रम त्यागी । ग्यान रंक नर मंद अभागी
पुनि सादर बोले मुनि नारद । सुनहु राम बिग्यान बिसारद 2


संतन्ह के लच्छन रघुबीरा । कहहु नाथ भव भंजन भीरा

सुनु मुनि संतन्ह के गुन कहऊँ । जिन्ह ते मैं उन्ह कें बस रहऊँ 3


षट बिकार जित अनघ अकामा । अचल अकिंचन सुचि सुखधामा

अमित बोध अनीह मितभोगी । सत्यसार कबि कोबिद जोगी 4

दोहा :

 सावधान मानद मदहीना । धीर धर्म गति परम प्रबीना 5

चौपाई :

बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहीं कोई

अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोई ।।

                                                                             (श्रीरामचरितमानस बालकांड)

निज गुन श्रवन सुनत सकुचाहीं । पर गुन सुनत अधिक हरषाहीं

सम सीतल नहिं त्यागहिं नीती । सरल सुभाउ सबहि सन प्रीति 1


जप तप ब्रत दम संजम नेमा । गुरु गोबिंद बिप्र पद प्रेमा

श्रद्धा छमा मयत्री दाया । मुदिता मम पद प्रीति अमाया ॥ 2


बिरति बिबेक बिनय बिग्याना । बोध जथारथ बेद पुराना

दंभ मान मद करहिं न काऊ । भूलि न देहिं कुमारग पाऊ 3


गावहिं सुनहिं सदा मम लीला । हेतु रहित परहित रत सीला

मुनि सुनु साधुन्ह के गुन जेते । कहि न सकहिं सादर श्रुति तेते ॥ 4


मुद मंगलमय संत समाजू । जो जग जंगम तीरथ राजू

राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा । सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा

                                                       (श्रीरामचरितमानस बालकांड)


Yog Prarambh Mantra