चिता दहति निर्जीवं, चिंता चैव सजीवकम् ।
चिता निर्जीव को जलाती है , जबकि चिंता जीवन को ही जलाती रहती है।
( समयोचितपध्यमालिक )
मानसिक तप मनः प्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते।। श्रीमद् भागवत गीता ( 1 7:1 6 ) मन की प...