योगः कर्मसु कौशलम् ।।2.50।।

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्।।2.50।।

बुद्धि-(समता) से युक्त मनुष्य यहाँ जीवित अवस्था में ही पुण्य और पाप दोनों का त्याग कर देता है। इसलिये तुम योग से युक्त हो जाओ, क्योंकि कर्मों में कुशलता ही योग है


Yog Prarambh Mantra