मेरा गुरुवर की कृपा से, सब काम हो रहा है। करते हो मेरे गुरुवर, मेरा नाम हो रहा है॥ ॥ मेरा आपकी प्रेरणा से...॥



 


मेरा गुरुवर की कृपा से
, सब काम हो रहा है।
करते हो मेरे गुरुवर, मेरा नाम हो रहा है॥
॥ मेरा आपकी प्रेरणा से...॥

  

पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है।
हैरान है ज़माना, मंजिल भी मिल रही है।
करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है॥

 

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं।
टूटी हुयी वाणी से, गुणगान कैसे गाऊं।
तेरी प्रेरणा से ही, सब यह कमाल हो रहा हैं॥
 
मुझे हर कदम कदम पर, तूने दिया सहारा।
मेरा  ज़िन्दगी बदल दी, तूने करके एक इशारा।
एहसान पे तेरा ये, एहसान हो रहा है॥

मनः प्रसादः सौम्यत्वं

  मानसिक तप मनः प्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते।।   श्रीमद् भागवत गीता ( 1 7:1 6 )     मन की प...